Wednesday, February 3, 2010

मुम्बई मुद्दा राजनीती का व्यावासिकरण है यहाँ सबको अपनी अपनी दुकान चलानी है . चाहे राजनितिक दल हो, बॉलीवुड हो या मीडिया.एक अंग्रेजी समाचारपत्र से कैरिएर के शुरुआत करने वाले बाल ठाकरे द्वारा माइकल जैक्सन का मुंबई आने पर स्वागत किया जाता है जावेद मियादाद के साथ फोटो खिचवाते है तीनो ठाकरे, बिहारी संजय निरुपम को अपनी पेपर का उपसंपादक बनाते है, बिहार उत्तर प्रदेश के अधिकता वाले सांसदों के साथ मिलकर करीब ६ साल केंद्र में राज करते है , उनका परिवार दो हिंदी फिल्मो का निर्माण करता है और दोनों सफल भी होती है तब न तो उन्हें मराठी मानुष याद आता है न मराठी लेकिन वोट बैंक खिसकता देखकर बाल ठाकरे जीवन के अंतिम पड़ाव पर मराठी मानुष के नाम पर अपने भतीजे के साथ राजनितिक प्रायश्चित कर रहे है एक्सन और थ्रिलर के साथ .
बॉलीवुड भी फक्र के साथ उनसे माफ़ी मांगता है(माय नाम इस खान के निर्देशक कारन जोहर WAKE UP SID के लिए) IPL में पाकिस्तानी खिलाडी तो नहीं खरीदते किंग खान लेकिन चिंगारी लगाने में पीछे नहीं रहते यह मजाक नहीं है तो और क्या है IPL का बजट SOUTH AFRIKA में कराने का है लेकिन पाकिस्तानी क्रिक्केटर खरीदने से बजट बिगड़ जाता है खुलकर कोई नहीं कहता की हमने पाकिस्तानी क्रिकेटरो को कुछ चरमपंथी ताकतों के डर से नहीं ख़रीदा (शिल्पा शेट्टी को छोड़कर). बादशाह बच्चन अपने फिल्म रण को लेकर बाल ठाकरे के घर पहुचने वाले है फिल्म में कांग्रेस के बड़े नेता बिलासराव देशमुख के पुत्र भी है यहाँ किसको राहुल गाँधी बता रहे है की ठाकरे की बात वह सुनते ही नहीं . शायद फिर किंग खान और कारन जोहर क्षमा याचना के लिए ठाकरे बंधू के घर जाये .
मुझे नहीं पता की सामना का सर्कुलेसन कितना है लेकिन रोज सुबह में TV खोलने पर उसमे छापी बेबुनियाद खबर का जिक्रे जरूर होता है क्यू की सस्ता और टिकाऊ रास्ता है न्यूज़ जुटाने का .
मतलब साफ है हर कोई बहती गंगा में हाथ दो रहा है गंगा कितनी दुसित हो रही है इससे किसी को मतलब नहीं है . यहाँ ना तो बिहार से किसी को मतलब है न महारास्त्र से सबको यहाँ अपने पाकेट और पोस्ट की चिंता है.

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